Corona and Pregnancy Care

कोरोना के वर्तमान दौर में सर्व व्यापक स्तर पर “सोशियल डिस्टेंसिंग” ही इस वैश्विक महामारी से बचाव की सर्वोत्तम राह है- यह तथ्य सर्वविदित है।
ऐसी परिस्थिति में गर्भवती महिलाओं के लिए प्रेगनेंसी के परामर्श व कोरोना से बचाव हेतु सामाजिक दूरी के बीच में सूक्ष्म संतुलन को बनाए रखने के लिए आवश्यक और अनुकरणीय जानकारी हम आपके साथ साझा कर रहे हैं।

1- परामर्श-
सामान्य परिस्थिति में नियमित चिकित्सकीय परामर्श का उद्देश्य रहता है- मां व गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य की सुरक्षा।

वैश्विक महामारी के इस चरण में जब कोरोना वायरस तेजी से फैल रहा है, सर्वोच्च प्राथमिकता “सामाजिक दूरी” बनाए रखने की है ।
इसी के मद्देनजर माननीय श्री नरेंद्र मोदी जी ,भारत सरकार ,व मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (MCI)
ने टेलीमेडिसिन अर्थात टेलीफोन या वीडियो कॉल के माध्यम से परामर्श के महत्व को मान्यता दी है।

टेलीमेडिसिन की औपचारिकता व अनुकूलता को अपने चिकित्सक से जानकर, आप गैर -आपातकालीन समस्याओं का निदान प्राप्त कर कोरोना बचाव व गर्भावस्था की देखरेख के बीच एक संतुलित समाधान पा सकते हैं।

2- Blood tests-

चिकित्सकीय परामर्श में रहते हुए खून की आवश्यक जांचों को समयानुसार होम सैंपल के माध्यम से ब्लड टेस्ट करवाना एक सुरक्षात्मक कदम हो सकता है।

प्रेगनेंसी के शुरुआत में बेसिक( baseline) टेस्ट,
तीसरे महीने में डबल मार्कर जांच और छठे महीने में दोबारा से प्रस्तावित टेस्ट करवाने के सामान्यतः निर्देश रहते है।

3 – सोनोग्राफी-

महामारी के आपातकालीन वर्तमान स्वरूप का चिकित्सकीय सेवाओं पर अत्यधिक दबाव है और सोनोग्राफी सुविधाओं पर भी इसका असर आया है। अत्यंत आवश्यक सोनोग्राफी के तौर पर तीसरे महीने में होने वाली NT SCAN सोनोग्राफी व पांचवे महीने में होने वाली TARGET, टारगेट सोनोग्राफी का उचित समय पर अपॉइंटमेंट लेकर सोनोग्राफी करवानी चाहिए।

4 टीकाकरण-

प्रेगनेंसी में सामान्यतः लगाए जाने वाले टिटनेस व फ्लू के टीके, वर्तमान परिस्थिति में तय समय पर अगर ना भी लग पाए तो यह आठवे माह तक लगाए जा सकते हैं।
कोरोना का टीका, जो कि समय की सर्वाधिक मांग है, उपलब्ध नहीं है और बचाव का एकमात्र विकल्प है, सामाजिक दूरी का पालन करना।

5- आपातकालीन परिस्थिति-

कुछ विशेष लक्षण , जिनमें तत्काल अपने डॉक्टर से संपर्क कर तय अस्पताल में पहुँचना चाहिए:

a – bleeding
b- leaking- गर्भाशय से पानी जाना
c- पेट दर्द- सतत रहने वाला/ बढने वाला
d- शिशु movement कम होना
e- महिला को स्वयं में अस्वस्थ महसूस होना।

6- प्रेगनेंसी में कोरोना या फ्लू के प्रभाव संबंधित आवश्यक जानकारी हमारी पिछली पोस्ट द्वारा आप सबसे साझा की गई है।

उम्मीद है कि प्रस्तुत जानकारी आप सबको कोरोना से बचाव बनाए रखते हुए गर्भावस्था के लिए उचित परामर्श व देखरेख की राह दिखाने में कारगर साबित होगी।

Dr. Hansali Neema Bhartiya
MD, DNB, FMAS, FICOG
9826088558

22/4/2020

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