Corona virus and pregnancy – What are the effects ?

वर्तमान परिवेश में जब कोरोना वायरस हमारे आसपास फैलने के दौर में है तो सभी के मन में यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि इसके परिणाम क्या हो सकते हैं और विशेषकर जो महिलाएं फिलहाल गर्भवती हैं या फिर गर्भधारण हेतु प्रयासरत हैं उनके लिए यह प्रश्न और भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है ।

चूंकि कोरोना वायरस दुनिया के लिए एकदम नया है तो फिलहाल जो जानकारी उपलब्ध है वह प्रभावित महिलाओं के आकलन से प्राप्त अनुभव व रॉयल कॉलेज , लंदन (RCOG, UK – 18/3/2020) के दिशा निर्देशों के अनुसार हैं।

1- अभी तक ऐसा देखा गया है कि गर्भवती महिलाओं के प्रभावित होने की संभावना व गंभीरता आम जनता के समकक्ष ही है । लिहाजा रोग प्रतिरोधक क्षमता कम करने वाली परिस्थितियाँ जैसे डायबिटीज , अस्थमा, इत्यादि इसके लक्षण और अधिक गंभीर कर सकती हैं, इसलिए ज्यादा सतर्कता आवश्यक है।

2- कोरोना वायरस के कारण गर्भपात होने की या गर्भस्थ शिशु में विकृति होने की संभावना में बढ़ोतरी नहीं पाई गई है, ना ही माता के द्वारा गर्भस्थ शिशु को खून के माध्यम से इन्फेक्शन ट्रांसफर होने के संकेत मिले हैं। पर वायरल इन्फेक्शन होने के कारण गर्भस्थ शिशु के विकास पर निगरानी रखना आवश्यक है ।

3-वर्तमान दौर में स्वस्थ गर्भवती महिलाओं को अपना रूटीन चेकअप कुछ दिनों के लिए अपने गायनेकोलॉजिस्ट से बात करके पोस्टपोन करवाना चाहिए एवं सिर्फ़ इमरजेंसी सर्विसेस में ही तत्काल मिलने के लिए संपर्क करना चाहिए।

4- प्रेगनेंसी में सर्दी या जुकाम होने पर अपने डॉक्टर के संपर्क में रहते हुए पूरी सतर्कता के साथ स्वयं को “होम- आइसोलेशन” में रखें और डरे नहीं क्योंकि यह साधारण फ़्लू भी हो सकता है। इसलिए फिलहाल कोरोना टेस्ट उन्हीं लोगों में प्रस्तावित है जिनके लक्षण या तो गंभीर हैं या तेजी से बढ़ते हैं या 7 दिन से अधिक के हैं । इस जानकारी के मद्देनजर अपने डॉक्टर के नियमित संपर्क में रहना बेहद आवश्यक है ।

5-यदि गर्भवती महिला को कोरोना वायरस इंफेक्शन होता है तो 95% से भी ज्यादा लोग पूरी तरह ठीक हो जाते है , जिनमें 80% से अधिक लोगों को साधारण फ़्लू की तरह खाँसी – बुख़ार के लक्षण पर ही रोग को प्रतिरोधक प्रणाली रोक देती है।

6- रिकवरी के बाद सोनोग्राफी के माध्यम से बच्चे के विकास का अध्ययन किया जाता है एवं एवं यदि शारीरिक स्वास्थ्य अनुकूल हो तो नॉर्मल डिलीवरी भी की जा सकती है, जिस दौरान गर्भस्थ शिशु की सीटीजी(CTG) मशीन द्वारा धड़कन की सतत निगरानी की जाती है।

7- डिलीवरी के बाद मां का दूध भी बच्चे को दिया जा सकता है । हवा के माध्यम से होने वाले वायरस के ट्रांसफर को कम से कम करने की ऐहतियात इस दौरान बेहद आवश्यक है ।

8- जो महिलाएं फिलहाल गर्भधारण हेतु प्रयासरत है एवं इलाज शुरू करने का सोच रही हैं, उन्हें फिलहाल घर के सुरक्षित परिवेश में रहने की सलाह का पालन करना चाहिए जिससे कम्युनिटी में वायरस का फैलाव कम से कम बना रहे।

9- जिन दंपतियों का निसंतान:ता हेतु इस माह इलाज शुरू हो चुका है , वो विधिवत अपने तय इलाज को जारी रख कर इस माह का इलाज पूरा ले सकते हैं ।

उपरोक्त जानकारी के अलावा, वर्तमान में तेजी से बदलते परिवेश में समयानुसार जैसे ही कोरोनावायरस और प्रेगनेंसी #Corona virus and pregnancy से संबंधित जानकारी और उन्नत होगी जनहित में हम इससे आगे आपको और अवगत कराते रहेंगे जिससे हम भय मुक्त हो कर कोरोना वायरस का सामना करने में समाज और देश में अपना जागरूक योगदान दे सके।

Dr Hansali Neema Bhartiya
MD, DNB, FMAS, FICOG
Indore
98260-88558
20/3/2020

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